
आधुनिक समाज पूरी तरह से डिजिटल हो चुका है और सोशल मीडिया इसका प्रमुख हिस्सा बन गया है। सोशल मीडिया इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म है, जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, टेलीग्राम, व्हाट्सऐप और यूट्यूब इत्यादि। ये वह माध्यम हैंलेखक: तौकीर अहमद (एड0) इंदिरा नगर, लखनऊ जो समाज के लोगों को आपस में एक-दूसरे से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं और लोग शब्दों, चित्रों, वीडियो, और अन्य प्रकार की सामग्री के माध्यम से आपस में संवाद करते हैं साथ ही दुनिया भर की जानकारी प्राप्त करते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया ने सूचना के प्रसार को अत्यंत सुगम और सस्ता बना दिया है। जहां पहले समाचारों और घटनाओं की जानकारी प्राप्त करने में समय लगता था, वहीं अब सोशल मीडिया के जरिए लोग घटनाओं के होने के साथ-साथ उनका लाइव अपडेट भी प्राप्त कर सकते हैं। जहाँ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अपने उपयोगकर्ताओं को उनकी रचनात्मकता को प्रदर्शित करने और सामाजिक तौर पर सक्रिय रहने का अवसर प्रदान करते हैं वहीँ व्यवसायों के लिए भी सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण टूल है, जो उन्हें उनके उत्पादों और सेवाओं का प्रचार करने, ग्राहकों से जुड़ने और व्यवसायिक अभियानों को तेज़ी से फैलाने में मदद करता है। शिक्षा के क्षेत्र में भी सोशल मीडिया का अत्यधिक योगदान है, आज सोशल मीडिया के माध्यम से लोग घर बैठे देश-विदेश से ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और अपनी अपनी फील्ड के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त कर रहे हैं। इन सब के अलावा सोशल मीडिया ही एक ऐसा माध्यम हैं जिसके के द्वारा विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर लोगों में जागरूकता फैलाना संभव हो पाया है, आज विभिन्न प्रकार के अभियानों के जरिए लोगों को सामाजिक, राजनीतिक, और पर्यावरणीय मुद्दों पर संवेदनशील किया जाना अत्यधिक सहज और सुगम हो गया है।
सोशल मीडिया के अनंत फायदों के बाद भी यही सोशल मीडिया “शोषण मीडिया” बनता जा रहा है आखिर क्यों ? शायद इसकी असल वजह है सोशल मीडिया का दुरूपयोग। अगर हम अपने आप पर, अपने परिवार पर और समाज पर नज़र डालें तो पता चलता है कि हर कोई चाहे वह पढ़ा लिखा हो, कम पढ़ा लिखा हो या फिर अनपढ़ ही क्यों न सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ है और इसमें कोई बुराई भी नहीं है मगर क्या हर कोई सोशल मीडिया का सही प्रयोग कर रहा है उम्मीद है कि जवाब आएगा नहीं, या जो लोग इसका उपयोग सही तरीके से कर भी रहे हैं तो वह किस हद तक इसका उपयोग कर रहे हैं यह भी एक अहम् और सोचने वाली बात है। कई शोध बताते हैं कि यदि सोशल मीडिया का प्रयोग आवश्यकता से अधिक किया जाए तो वह हमारे मस्तिष्क को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है और हमे डिप्रेशन की ओर ले जा सकता है। और यह सब हमें अपने परिवार और समाज में देखने को भी मिल रहा है। यह सच है कि सोशल मीडिया ने दूरियां तो ज़रूर समेट ली हैं और लोगों को आपस में जोड़ दिया है मगर क्या वास्तव में ऐसा है शायद नहीं क्यों कि हम अपने परिवार और समाज में देखते हैं कि लोग एक दुसरे के साथ हो कर भी एक दुसरे से जुदा जुदा दिखते हैं। शायर मेराज फ़ैज़ाबादी ने कहा था कि *”रिफ़ाक़तों कि ढलानें उतर रहे हैं हम, सिमट रही हैं दिशाएं बिखर रहे हैं हम”*, पति-पत्नी, माँ-बाप और बच्चे, भाई-बहन सब एक दूजे के साथ होते हुए भी तनहा नज़र आते हैं इसकी वजह यह है कि एक दुसरे से बात करने की बजाये सब अपने अपने मोबाइल में लगे रहते हैं। बच्चे आउटडोर गेम खेलने के बजाये ऑनलाइन गेम पसंद कर रहे हैं और कई प्रकार के खतरनाक गेम खेल कर खुद भी आक्रोशित होते जा रहे हैं जिस कारण बच्चों में मानसिक और शारीरिक बीमारियां घर कर रही हैं। आज बच्चे अपने बड़ों का आदर और सम्मान नहीं कर रहे हैं ज़्यादा कुछ कहने पर गलत क़दम उठा रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से समाज में फूहड़ता और नंगापन फैलता जा रहा है जिसका बुरा प्रभाव समाज के किशोरों के मन मस्तिष्क पर पड़ रहा है और समाज में छेड़छाड़, बलात्कार, किडनैप और हत्या जैसे अपराध अपना पैर पसार रहे हैं। सोशल मीडिया से साइबर-बुलिंग, हैकिंग, फिशिंग और धोकाधड़ी जैसे अपराधों का खतरा दिन दूना रात चौगुना बढ़ता जा रहा है कब अकाउंट खली हो जाये पता ही नहीं चलता, फेक न्यूज़ और हेट स्पीच के फैलने से सामाजिक और धार्मिक दंगे भड़क जाते हैं जो हमारे देश हित के लिए घातक होते हैं, सोशल मीडिया पर गोपनीयता की कमी होती है जिस कारण किसी भी व्यक्ति का निजी डेटा चोरी होने का खतरा रहता है। अब यह समझ नहीं आता कि क्या सोशल मीडिया का सदुपयोग करके उसे हितकारी बनाया जा रहा है या उसका दुरूपयोग कर इसे “शोषण मीडिया” का रूप दिया जा रहा है।
इसमें कोई शक नहीं कि सरकार द्वारा साइबर अपराधों को रोकने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाये जा रहे हैं, हमारे देश में साइबर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (आईटी अधिनियम 2000) पारित किया गया जोकि भारत का प्राथमिक साइबर कानून है। इसके अलावा साइबर अपराधों पर लगाम लगाने और साइबर पीड़ितों कि मदद के लिए सरकार द्वारा हेल्पलाइन नंबर भी जारी किये गए हैं जिससे बड़ी संख्या में साइबर अपराधों पर नियंत्रण किया गया है परन्तु इन सबके बावजूद भी साइबर अपराधों कि संख्या बढ़ती चली जा रही है और समाज इनके चक्कर में फंसता चला जा रहा है। कहा जाये तो सोशल मीडिया वह मीडिया है जिसके चंगुल में जो फँस गया वह फँस गया और इसके चंगुल से निकलना एक नमुमकिन सी बात हो। यह कहना उचित है कि यदि सोशल मीडिया का सही उपयोग हो तो इसमें अनंत लाभ हैं वर्ना इसका दुरूपयोग इसे सोशल मीडिया से “शोषण मीडिया” ही बना देता है।




