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शिक्षा मंचों पर प्रेरक व्यक्तित्वों की आवश्यकता

हिमांशु वर्मा

शिक्षा मंचों पर प्रेरक व्यक्तित्वों की आवश्यकता

विद्यालय और शिक्षण संस्थान केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं होते, बल्कि बच्चों के लिए जीवन मूल्यों और आदर्शों को सीखने का माध्यम भी होते हैं। वार्षिकोत्सव, परीक्षा परिणाम वितरण या सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे अवसर बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में देखा जा रहा है कि इन आयोजनों में राजनीतिक व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाने लगी है।

निस्संदेह समाज के हर वर्ग के लोग सम्माननीय हैं, किंतु शिक्षा मंचों का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं होना चाहिए। यह मंच तब सार्थक बनता है जब वहाँ ऐसे व्यक्तित्व उपस्थित हों जिनका जीवन परिश्रम, ज्ञान, अनुशासन और समाज-सेवा से जुड़ा हो। बच्चों को प्रेरणा तभी मिलेगी जब उनके सामने वास्तविक आदर्श खड़े हों।

सबसे पहले, सम्मान का अधिकार उनके शिक्षक को मिलना चाहिए, जिन्होंने पूरे वर्ष बच्चों को गढ़ा और उनका मार्गदर्शन किया। इसके अतिरिक्त यदि किसी अतिथि को आमंत्रित करना हो, तो वह कोई शिक्षाविद, वैज्ञानिक, खिलाड़ी, कलाकार या सैनिक हो सकता है—ऐसा व्यक्ति जिसके अनुभव और जीवन संघर्ष बच्चों के लिए सीख का स्रोत बनें।

यदि हम चाहते हैं कि हमारी नई पीढ़ी ऊँचे सपने देखे और उन्हें पूरा करने का साहस जुटाए, तो शिक्षा के मंचों को राजनीति से दूर रखना होगा। वहाँ केवल प्रेरणा, ज्ञान और सकारात्मक आदर्शों की उपस्थिति होनी चाहिए। यही शिक्षा की गरिमा है और यही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सच्ची गारंटी भी।

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