जमानत का क्या अर्थ क्या होता है?
सिद्धान्त कपिल एडवोकेट* *सिविल एण्ड सेशन कोर्ट बाराबंकी

जमानत का अर्थ है — किसी अभियुक्त को मुक़दमे या जांच के दौरान, न्यायालय या पुलिस की अनुमति से कुछ शर्तों पर, अस्थायी रूप से हिरासत से मुक्त करना। इसका उद्देश्य अभियुक्त की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सुरक्षित रखना है, बशर्ते वह ज़रूरत पड़ने पर न्यायालय में उपस्थित होता रहे।
जमानत के प्रकार –
मुख्य रूप से जमानत के तीन प्रकार होते हैं:
नियमित (Regular) जमानत
अग्रिम (Anticipatory) जमानत
अंतरिम (Interim) जमानत
जमानत और बेल में अंतर
क़ानून में “जमानत” और “बेल” अक्सर एक ही अर्थ में प्रयोग होते हैं। हिंदी में इसे “जमानत” कहा जाता है, जबकि अंग्रेज़ी में “Bail” कहा जाता है। दोनों का उद्देश्य अभियुक्त को हिरासत से रिहा करना है, शर्त यह है कि अभियुक्त मुकदमे में शामिल होता रहेगा।
कौन सी धारा में जमानत नहीं मिलती है –
भारतीय दण्ड संहिता (IPC) के ऐसे अपराध जिनमें CrPC की धारा 437 और 439 के अंतर्गत अपराध “ग़ैर-जमानती (Non-bailable)” घोषित होते हैं, उनमें स्वतः जमानत का अधिकार नहीं होता। जैसे — हत्या (IPC 302), बलात्कार (IPC 376), आतंकवाद, देशद्रोह, डकैती आदि गंभीर अपराधों में सामान्यतः जमानत नहीं मिलती।
नियमित जमानत-
जब किसी अभियुक्त को गिरफ़्तारी के बाद, मजिस्ट्रेट या सेशन कोर्ट द्वारा मुकदमे या जांच के दौरान रिहा किया जाता है, तो इसे नियमित जमानत कहते हैं।
अग्रिम जमानत –
जब कोई व्यक्ति आशंका करता है कि उसे गिरफ़्तार किया जा सकता है, और गिरफ़्तारी से पहले ही अदालत से गिरफ़्तारी पर रोक (protective order) लेकर रिहाई की गारंटी लेता है, तो इसे अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail – CrPC धारा 438) कहते हैं।
अंतरिम जमानत –
किसी जमानत याचिका के अंतिम निर्णय तक अस्थायी तौर पर अदालत द्वारा दी गई रिहाई को अंतरिम जमानत कहते हैं। यह अस्थायी और समय-सीमा युक्त होती है।
जमानत कब रद्द होने का कारण –
जमानत रद्द (Cancellation of Bail) हो सकती है अगर:
अभियुक्त शर्तों का उल्लंघन करे,
साक्ष्यों को नष्ट करने की कोशिश करे,
गवाहों को धमकाए,
अपराध को दोहराने का प्रयास करे,
न्यायालय में पेश न हो।
मुचलका क्या होता है –
मुचलका एक लिखित वचन-पत्र (Bond) होता है जिसमें अभियुक्त या कोई अन्य व्यक्ति यह लिखित आश्वासन देता है कि अभियुक्त मुक़दमे की तारीख़ों पर अदालत में उपस्थित होगा, अन्यथा दी गई राशि ज़ब्त कर ली जाएगी।
निजी मुचलका –
जब अभियुक्त स्वयं ही अदालत को लिखित वचन देता है कि वह निर्धारित शर्तों का पालन करेगा, और इसके लिए उसे किसी ज़मानतदार की ज़रूरत नहीं पड़ती, तो इसे निजी मुचलका कहते हैं।



