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फतेहपुर के लोग इल्म व अदब के हवाले से अपनी अलग शिनाख्त रखते हैं- डॉ अम्मार रिज़वी

"वक्त से आंख मिलाने की हिमाकत न करो, वक्त इंसान को नीलाम भी कर देता है।"

फतेहपुर बाराबंकी। कल रात सूफी संत मखदूम शेख हिसामुद्दीन रह0 के उर्स के मौके पर मेला पंडाल मे आल इंडिया मुशायरा मुनक्किद हुआ।

राष्ट्रीय सहारा उर्दू के जिला बाराबंकी ब्यूरो चीफ हशमतुल्ला की सदारत मे होने वाले मुशायरा मे जलसे को खिताब करते हुए खुसूसी मेहमान साबिक कारगुज़ार वजीर आला उत्तर प्रदेश डॉ अम्मार रिज़वी ने कहा कस्बा फतेहपुर के लोग इल्म व अदब के हवाले से अपनी अलग शिनाख्त रखते है।

इस मौके पर मेला अध्यक्ष पूर्व चेयरमैन मो मशकूर,मेला इंचार्ज सय्यद जफरुल इस्लाम ज्वाइंट सेक्रेटरी नसीम गुड्डू ने आए हुए मेहमानों को मोमेंटो व शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया।

मशहूर नाजिम ए मुशायरा नदीम फर्रुख की निजामत मे मुशायरा का आगाज पहली बार फतेहपुरी की नुमाइंदगी कर रहे नौजवान शायर हस्सान साहिर की नात ए पाक से हुआ।सुबह तक चले मुशायरे मे जिन शायरों को बहुत पसंद किया गया वो इस तरह है –

मुझे मरना है इक जालिम के हाथों,कहानी मे यही किरदार हूं मै – दानिश ग़ज़ल

बहुत अदब से मुरव्वत से चाहतों से मिले मुनाफिकों की तरह हम मुनाफिकों से मिले -ताहिर फराज

अपना ग़म इस तरह थोड़ा कम कीजिए,दूसरों के लिए आंख नम कीजिए – शबीना अदीब

उनसे नजर मिलाए कई रोज हो गए,पैगाम उनका आए कई रोज हो गए- शबाना शबनम

तुम्हारी लाठियां जादू से सांप बनती है,हम अपनी लाठी से अजगर निकाल लेते हैं-उस्मान मिनाई

वक्त से आंख मिलाने की हिमाकत न करो, वक्त इंसान को नीलाम भी कर देता है -नदीम फर्रुख

उन्हीं से पूछिए तफसीले उसअते सहरा, जो लोग इश्क में दुनियां लुटाए बैठे हैं -अज्म शाकिरी

वो था कि मेरी बीवी को लेकर हुआ फरार,मै दोस्तों को शेर सुनाने में रह गया – जहाज देवबंदी

दर्द दुनियां के झेले हैं,साथ रह कर भी हम अकेले हैं – हाशिम फिरोजाबाद

मिरी जानिब मोहब्बत से न देखो,मोहब्बत पर जवाल आया हुआ है – खुर्शीद हैदर

मोहब्बत के फरिश्तो ने मुकद्दस रौशनाई से,हमारे दिल की तख्ती पर तुम्हारा नाम लिखा है -शरफ नानपरवी

इतना झुंझला गए तोड़कर रख दिया,सामने उनके जब आईना ले गए – वसीम रामपुरी

इनके अलावा अली बाराबंकवी,फैज खुमार,वसीम राजूपूरी,लोकेश त्रिपाठी, ओम शर्मा ओम और मकसूद पयामी ने भी अपना कलाम पेश किया।

इस मौके पर चौधरी तालिब नजीब कोकब,फराजुद्दीन किदवई,तारिक जिलानी,एड फरहत उल्लाह,सय्यद आरिफ महमूद,अबूजर फ़जल अंसारी,पत्रकार सय्यद खालिद महमूद,इश्तियाक कुरैशी,नसरे आलम,जावेद यूसुफ,कलीम नईमी और कफील खान मौजूद रहे।

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