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सफ़वीद ख़ानक़ाह के नशीन सज्जादा हज़रत अफ़ज़ल मुहम्मद फ़ारूक़ी की माँ का निधन, अत्यंत गमगीन माहौल में सफीपुर की आवाम ने दी अंतिम विदाई।

उपमुख्यमंत्री तथा राजनीतिक एवं सामाजिक नेताओं ने सफीपुर पहुंच कर शोक संवेदना व्यक्त की।

उन्नाव। समादी मियां और नायब सज्जादा नशीन हजरत अफजल मुहम्मद फारूकी की मां का कल लंबी बीमारी के बाद लखनऊ के एक अस्पताल में निधन हो गया। मृतका का पार्थिव शरीर लखनऊ से सफीपुर लाया गया। उनके निधन से न केवल खानकाह बल्कि क्षेत्र के लोग भी शोक में हैं। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। राजनीतिक, सामाजिक और विभिन्न संगठनों के नेताओं ने शोक संवेदना व्यक्त की। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक सफीपुर में शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे। उनके साथ क्षेत्र के भाजपा नेता भी मौजूद थे।
इस दुखद मौके पर विशिष्ट अतिथियों में नैयर मियां साहब रुदौली शरीफ, हरी बदायूँ शरीफ से आतिफ मियां कादरी, मदनी मियां खैराबाद शरीफ, एहसानुल्लाह शाह अबू सईद सैयद सरावन, हरी सैयद सरावां से हसन मियां, शोएब मियां खैराबाद शरीफ, मोईन अल्वी खैराबाद शरीफ, अल्लामा इमरान साहब, प्रिंसिपल जामिया आरिफिया डॉ. सैयदा करम झार बेहटा, आतिफ मियां झगवान शरीफ और लईक नाजिम खादीमी सफवी शामिल थे। सफीपुर, नियाज खादिम सफवी, और वकील अहमद खलीली, हक सफवी और अन्य ट्रस्टी। सैयदवाड़ा की शिया मस्जिद के इमाम इफ्तिखार हुसैन रिजवी और शिया सज्जन भी मौजूद रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में आलिम, हुफ़्ज़ाज़, असेंबली के सदस्य, राजनीतिक नेता, कस्बों के पूर्व और वर्तमान अध्यक्ष और विभिन्न गांवों के पूर्व और वर्तमान के नेता भी मौजूद थे। राष्ट्र के सभी वर्गों, राजनीतिक और सामाजिक, शिया, सुन्नी, हिंदू, मुस्लिम, सिख, के लोग अंतिम संस्कार में भाग लेते देखे गए।
हजरत अफजल मुहम्मद फारूकी ने बताया 25 जून,1968 को उनकी माँ का विवाह उनके पिता हज़रत ऐज़ाज़ मुहम्मद फ़ारूक़ी से हुआ। वह काकोरी के अब्बासी परिवार से थीं। उन्होंने हज़ारों बच्चों को मुफ़्त में अंग्रेज़ी और अन्य विषय पढ़ाकर उनके जीवन को समृद्ध बनाया। प्रेम ही उनका धर्म था। आज न केवल मुसलमान, बल्कि हिंदू समुदाय के लोग भी उनके निधन से बेहद दुखी हैं।
ईशा की नमाज़ के बाद, खानकाह सफ़वीद दारुल अमन के पिछवाड़े में जनाज़े की नमाज़ अदा की गई। जनाज़े की नमाज़ नायब सज्जादा हज़रत अफ़ज़ल मुहम्मद फ़ारूक़ी ने अदा कराई।जनाज़ा सैय्यद वाड़ा से पिछली सड़क से होते हुए दार मखदूम शाह सफ़ी पहुँचा और हज़ारों नम आँखों और गमगीन दिलों के बीच, ऐजाज़ मुहम्मद फ़ारूक़ी,जिन्हें शम्मू मियाँ के नाम से भी जाना जाता है,के बगल में दफ़न किया गया। अपनी मित्रता, करुणा, दया और मानवता की सेवा के कारण मृतका हिंदू और मुसलमान दोनों के दिलों में मां का स्थान रखती थीं। खानकाह और आसपास के गांवों के लोग उन्हें प्यार से “अम्मी ” कहते थे। उनके जाने से हिंदू और मुसलमानों ने भी मां का स्नेह खो दिया है।आसपास के गाँवों के चेयरमैन, वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्री, राजनीतिक नेता, सामाजिक नेता और प्रमुख व गणमान्य व्यक्ति भी खानकाह पहुँचे और शोक व्यक्त किया तथा मृतिका की मगफिरत की दुआ। हर जाति और धर्म के लोग शोक व्यक्त करने आए और खानकाही परिवार के इस दुःख में शामिल हुए। सैयद वाड़ा के शिया पुरुष सबसे पहले शोक व्यक्त करने पहुँचे। इस अवसर पर दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। इस अवसर पर खानकाह के सहयोगी और श्रद्धालु महिलाएँ और बच्चे मृतक की दया और प्रेम को याद कर रो पड़े, हर कोई विलाप करता हुआ दिखाई दिया।नायब सज्जादा हज़रत अफ़ज़ाल मुहम्मद फ़ारूक़ी ने कहा कि उनकी मां का जीवन मानवता की सेवा और त्याग की एक मिसाल था। उन्होंने मानवता की सेवा और शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए जो दीप जलाया, वह सदैव प्रज्वलित रहेगा। उनकी मां अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर थीं। शिक्षा और प्रशिक्षण के प्रति उनमें गहरी रुचि थी। उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा ख़ानक़ाह और उसके आसपास के क्षेत्रों में काम करते हुए बिताया।
सफीपुर और अन्य क्षेत्रों के राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां, धार्मिक नेता, और बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं समेत हर वर्ग के लोग सफीपुर में उमड़ पड़े और अपनी संवेदना व्यक्त की। विधायक, सांसद, विधानसभा सदस्य, नगर अध्यक्ष आदि जनप्रतिनिधियों के साथ ही छोटे बड़े अधिकारी भी शामिल रहे।

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