
फतेहपुर बाराबंकी – मक़ामी हैदरी जामा मस्जिद में बाद नमाज़े मग़रिबैन मरहूम सय्यद रशीद अब्बास काज़मी और हाजी सय्यद शफ़ीक़ अब्बास काज़मी के ईसाले सवाब के लिए क़ुरान ख़ानी और मजलिसे अज़ा मुनक़क़िद की गई।
जलसे को मौलाना सय्यद हसनैन बाक़री ने ख़िताब किया। मौलाना ने अपने खिताब मे कहा कि हमारे आक़ा सरदार हज़रत मुहम्मद (सल) सिर्फ मुसलमानों के नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए रहबर पेशवा और आइडियल हैं। नबी (सल) से बढ़कर कोई भी नहीं है। नबी (सल) ने अपने अच्छे किरदार और इख़लाक़ से दुश्मनों को अपना दोस्त बनाया।
नबी (सल) को नबी और रसूल (सल) अल्लाह ने बनाया है। अल्लाह ही जिसको चाहता है नबी,रसूल, इमाम, ख़लीफा और हादी बनाता है। इंसान ये काम नहीं कर सकता है और ना इंसानों को ये हक़ हासिल है।
मौलाना ने मज़ीद कहा कि आजकल हर परेशानी हर बुराई का सिर्फ एक ही इलाज है और वो है इल्म का हासिल करना। आज मुसलमानों को चाहिए कि भले ही एक वक़्त का खाना खाएं लेकिन अपने बच्चों को ज़रूर पढ़ाएं। अपने बच्चों को साइंस टेक्नोलॉजी और बाक़ी जदीद उलूम की तालीम ज़रूर दिलवाएँ। अपने बच्चों को IAS ऑफिसर, वकील, जज बनायें। कोई भी परेशानी हो मगर पढ़ाई से कोई समझौता ना करें।
मसाएब में मौलाना ने नबी (सल) की बेटी फातिमा ज़हरा (सल) के मसाएब पढ़े और बताया की इसी महीने (जमादुल अव्वल) की 13 तारीख को हज़रत फातिमा ज़हरा की शहादत हुई।
आज की मजलिस में जमाल मेहदी, इजलाल मेहदी, जाफर मेहदी, बाक़िर ज़ैदी, हाजी सुलेमान, सफ़दर ज़ैदी जैसे लोग भी मौजूद थे।



