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हस्सान साहिर के आवास पर मुशायरा, शायरों ने बिखेरा कलाम का जादू।

बाराबंकी उत्तर प्रदेश

संपादक: फहीम सिद्दीकी

फतेहपुर (बाराबंकी) कस्बा फतेहपुर के मोहल्ला नालापार दक्षिणी में बज़्म-ए-अरबाब-ए-सुख़न की ओर से शायर हस्सान साहिर के आवास पर एक गैर-तरही मुशायरे का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की सरपरस्ती हाजी शेख मतीउल्लाह हुसैनी ने की, जबकि अध्यक्षता नसीम अख्तर कुरैशी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व नगर पंचायत सदस्य शाहिद अली मंसूरी तथा मोहम्मद अकीक ‘पप्पू’ मौजूद रहे।

मुशायरे का संचालन अमीर फैसल लखनवी ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मौलाना कारी मोहम्मद बिलाल हलीमी की तिलावत-ए-कुरआन से हुआ, जबकि हाफिज सलमान राईन ने नात-ए-पाक पेश कर महफिल को रूहानी रंग दिया।

मुशायरे में क्षेत्र के कई शायरों ने अपने बेहतरीन अशआर पेश कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। नसीम अख्तर कुरैशी ने पढ़ा—

“तू हुस्न की मलिका है, तेरा ताज हया है,बे-पर्दा निकलना तेरा दस्तूर नहीं है।”

अहमद सईद ‘हर्फ़’ ने कहा—

“ये जगमगाते हुए जुगनुओं से कह दो तुम,मैं एक चराग ही काफी हूँ रोशनी के लिए।”

हस्सान साहिर ने अपना शेर पेश किया—

“आरामगाह आज तलक मिल नहीं सकी,दर-दर भटक रहा हूँ ठिकाने के बावजूद।”

मतीउल्लाह हुसैनी ने कहा—

“सलीका झूठ का कितना हो लाजवाब मगर,जो आए सामने सच के, अता-पता न मिले।”

इसी क्रम में शादाब अनवर, हसन नईम, अमीर फैसल, बिलाल नासिर, जावेद कुंवारा और हसीब फतेहपुरी ने भी अपने-अपने अशआर से श्रोताओं का दिल जीत लिया।

कार्यक्रम में विशेष रूप से मुशीर राईन, अता हुसैन, अफज़ाल खान, फरमान खान, रिहान खान सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।

अंत में मेजबान शायर हस्सान साहिर ने सभी शायरों, अतिथियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन पर खुशी जताई।

 

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